विचार कभी सामान्य नहीं होते

विचार तो मन में आते हैं लेकिन हम उन्हें सही दिशा नहीं दे पाते। अपनी आंखों के सामने हर पल कुछ नया देखते हैं लेकिन उसके बारे में सोच नहीं पाते, अगर सोचते हैं तो शब्दों में ढ़ालना मुश्किल है। शब्दों में ढ़ाल भी दें तो उसे मंच देना और भी मुश्किल है। यहां कुछ ऐसे ही विचार जो जरा हटकर हैं, जो देखने में सामान्य हैं लेकिन उनमें एक गहराई छिपी होती है। ऐसे पल जिन पर कई बार हमारी नजर ही नहीं जाती। अपने दिमाग में हर पल आने वाले ऐसे भिन्न विचारों को लेकर पेश है मेरा और आपका यह ब्लॉग....

आपका आकांक्षी....
आफताब अजमत



Monday, October 25, 2010

हो सकता है आपको यह अच्छा न लगे

आज मैं जो लिखने जा रहा हूं, हो सकता है कुछ लोगों को पसंद न आए। मैं आजाद देश का आजाद प्राणी हूं तो मुझे भी अपनी बात कहने का हक है। बाबरी मस्जिद मामले में याचिका दायर करने वाले हाशिम अंसारी की भावनाओं की कद्र करते हुए मैं जो लिखने जा रहा हूं, वह कड़वा सच है।

बाबरी मस्जिद विवाद। खौफनाक इंसानी लड़ाई के बाद लंबे सालों तक कानूनी लड़ाई। नतीजा, जमीन का बंटवारा। यह है बाबरी मस्जिद मामले की सच्चाई। मामले में भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट को आधार बनाया गया। सबने इसकी सराहना की लेकिन कई लोगों ने इस पर अपना विरोध भी जताया। खैर, मैं इस रिपोर्ट से व्यक्तिगत रूप से सहमत हूं। जाहिर तौर पर आपके दिमाग में सवाल होगा क्यों, तो आइए मैं आपको बताता हूं।

भारत, वह देश जहां सबसे पहले हिंदू संस्कृति की उत्पत्ति मानी जाती है। वह संस्कृति, जो पूरी दुनिया में सबसे महान संस्कृति इसलिए है क्योंकि इसने हर बार दूसरे धर्मों और संस्कृतियों को अपने अंदर समाहित किया। चूंकि हिंदू संस्कृति की उत्पत्ति यहीं से हुई है तो जाहिरतौर पर यहां की जमीन और जंगल भी इस संस्कृति की ही विरासत है। दूसरी संस्कृतियां और धर्म यहां चलकर आए हैं और हिंदू संस्कृति ने उन्हें पनाह, जंगल और जमीन दी। ऐसे में पहला हक तो हिंदू संस्कृति का ही बनता है। अब मुगलकाल आया तो इसी जमीन पर मस्जिद बना दी गई। इंसान की इंसानियत खत्म हुई तो वह मस्जिद और मंदिर में फेर करने लगे। बात यहां तक पहुंच गई कि मस्जिद को ढ़हा दिया गया। नतीजतन कई सालों तक इंसानियत के बीच खाई बनी रही। अब फैसला आया तो इस पर राजनीति फिर से शुरू हो गई। लेकिन लंबे सालों की कानूनी लड़ाई ने मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी को एक सीख दे दी है कि हम सब भारतवासी हैं तो हम क्यों मंदिर मस्जिद की झगड़ों में अपना वक्त, जोश और जवानी ज़ाया कर रहे हैं। मामले की सुनवाई कर रहे जजों की पीठ में शामिल जस्टिस डीवी शर्मा की रिपोर्ट की बात करें तो मस्जिद वाली जगह के पास कई छोटे मंदिर भी थे, जिनमें हिंदू नियमित तौर पर पूजापाठ कर रहे थे। मस्जिद ढ़हाने गए लोगों ने इन मंदिरों को भी नहीं बख्शा। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह मंदिर और मस्जिद विवाद महज हम इंसानों के बीच खाई पैदा कर राजनीति का एक फंडा है। खैर, मेरा तो यह मानना है कि जब मुस्लिम धर्म की उत्पत्ति भारत में हुई ही नहीं तो यह जमीन किसकी है, फैसला आपके हाथ…

2 comments:

S.M.Masoom said...

यह मंदिर और मस्जिद विवाद महज हम इंसानों के बीच खाई पैदा कर राजनीति का एक फंडा है। सही कहा है. सराहनीय आतंकवाद:आवश्यकता है वास्तविकता को पहचानने की

Taarkeshwar Giri said...

Very Nice Post.